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Wednesday, 26 October 2016

राजपुरोहित बालिका संस्कार शिविर मेंं बेटियों ने खुद संभाली कमान, हर व्यवस्था में दिया योगदान




पाली । प्रथम सत्र : शिविर का उद्देश्य संघ की योजना
शिविर के उद्घाटन सत्र में वेदांताचार्य ने ऐसे शिविरों की आवश्यकता, उसके उद्देश्यों के बारे में बताया। साथ ही संघ की और से बालिकाओं के लिए किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला।

द्वितीयसत्र : व्यक्तित्व विकास की शिक्षा संस्कार 
द्वितीय सत्र में बालिकाओं के व्यक्तित्व विकास शिक्षा के स्तर को लेकर जानकारी दी। कई वक्ताओं ने कॅरियर गाइडेंस भी दिया। परिवार,समाज की परंपराओं संस्कार तथा व्यक्तित्व विकास के सूत्र बताए।

तृतीय सत्र : आदर्श दिनचर्या समय पालन
बेटी बचाओं  अभियान के रोल मॉडल पाली में मंगलवार को बेटियों ने नया इतिहास रच दिया। राजपुरोहित समाज की 81 गांवों से पहुंची 1008 बेटियों ने अपने लिए आयोजित संस्कार शिविर को सफल बनाने के लिए कमान भी अपने हाथ में ही संभाली। बालिकाओं के आयोजित शिविर में एक हजार से अधिक बालिकाओं के खाने से लेकर नाश्ते अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी बालिकाओं ने खुद संभाली। यहां तक की 10 ब्लाकों में बांटे शिविर में ग्रुप लीडर की भूमिका में भी बेटियों को ही आगे रखा। पहली बार आयोजित किए शिविर में बेटियों के जोश-जज्बे और जुनून को वहां मौजूद अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तथा समाज बंधुओं ने सैल्यूट किया।

अखिल विश्व राजपुरोहित खेतेश्वर युवा सेवा संघ के तत्वावधान वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम महाराज के सानिध्य में श्री  आत्मानंद राजपुरोहित छात्रावास में बालिका संस्कार शिविर का राजपुरोहित समाज कि ओर  आयोजन किया गया। शिविर में प्रत्येक व्यवस्था का जिम्मा बेटियों ने खुद आगे आकर लिया। मंच संचालन शिविर सत्रों को लेकर समय निर्धारण करना अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी का सफल निर्वहन किया। सुबह 8 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक चले संस्कार शिविर में अलग-अलग सत्रों में बालिकाओं को संस्कारित किया गया। बालिकाओं को कॅरियर गाइडेंस को लेकर भी जागरूक किया। शिविर में कक्षा 10 से लेकर पीजी अन्य विषयों में डिग्री कोर्स डि‍प्‍लोमा कर रही बालिकाओं ने भाग लिया। इस शिविर में कलेक्टर कुमारपाल गौतम, एसपी दीपक भार्गव, दुर्गसिंह, रेणु तिवारी, एडीईओ केके राजपुरोहित सहित अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों ने शिविर में बालिकाओं को संस्कारित किया। इस दौरान समाज को नशामुक्त करने को लेकर बेटियों ने अपने घर से ही इसकी शुरूआत करने का संकल्प भी लिया।

जिले के बाहर रहने वाली बालिकाएं भी आई शिविर में : राजस्थान से बाहर उद्योग व्यापार करने वाले परिवारों की बेटियां भी संस्कार शिविर में भाग लेने के लिए आई। पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजित हुए शिविर को लेकर करीब 4 महीने से इसकी रुप रेखा तैयार की गई थी। बैंगलोर, दिल्ली, मैसूर, पूणे, मुंबई अन्य शहरों में निवास करने वाले परिवार की बेटियों ने भी संस्कार शिविर में उत्सुकता पुर्ण  भाग लिया।

बालिकाओं के कामकाज की दिनचर्या समय का सही उपयोग करने। वर्तमान समय में मोबाइल इंटरनेट का सकारात्मक उपयोग करने, एव कैरियर संवारने के लिए बल दिया।

चतुर्थ सत्र: बालिका शिक्षा कर्तव्य बोध की भावना 
बालिकाओंको अपने परिवार में उनकी भूमिका चुनौतियों के बारे में समझाया। अपने अधिकारों की रक्षा करने तथा बालिकाओं द्वारा समाजहित में किए जाने वाले कार्यों के बारे में भी बताया।

पाचंवासत्र : अनुभव कथन समापन सत्र 
साथ ही बालिकाओं ने कविता, गीत, भजन सहित कई विषयों के माध्यम से अपने अनुभव शेयर किए। इस दौरान समाज की प्रतिभाओं की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। 

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