साहुकारपेट स्थित खेतेश्वर भवन में विराजित अखिल भारतीय साधु समाज राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष संत निर्मलदासजी महाराज ने कहा मानव का प्रथम देव उसके माता-पिता हैं इसलिए उनकी आज्ञा का पालन, सेवा करें। माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करें। उनकी सेवा से भगवान शुभ फल देते हैं। मानव जीवन बार-बार नहीं मिलता। बच्चों से कहा सुबह जल्दी उठकर स्नान कर माता-पिता के चरण-स्पर्श करने चाहिए। हमेशा बड़ों का सम्मान करें।
आज के युग में संयुक्त परिवारों का विघटन हो रहा है एवं नैतिक मूल्यों में कमी आई है। ऐसे में समाज के इन नन्हे-मुन्नों को पूरी तरह संस्कार नहीं मिल पाते। ऐसे में संस्कार शालाओं का संचालन होना सराहनीय कार्य है क्योंकि संस्कारों के माध्यम से ही बच्चों को अच्छा इन्सान बनाया जा सकता है। अभिभावकों को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने चाहिए। शिक्षित एवं भावी पीढ़ी ही समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करेगी। राजपुरोहित बाल संस्कार शाला के सदस्यों ने उनका सम्मान किया। इस मौके पर बगङ्क्षसह बागरा, नरेशकुमार ऐलाणा, शंकरलाल मणोरा, चम्पालाल साकरणा व भंवरसिंह डकातरा समेत अनेक लोग उपस्थित थे।
No comments:
Post a Comment