बाड़मेर। धोरों की धरती बाड़मेर में माटी के झरने जितने आकर्षक रहे हैं, उतना ही रहस्यमयी है यहां के सेतराऊ गांव का एक धोरा, जिसकी रेत टकराते ही वाद्य यंत्र एव जैसी आवाज करती है। यह करिश्मा क्यों है, इस विषय पर भूगोल और भू-गर्भ के विशेषज्ञों की भी समझ यहा जवाब दे जाती है, लेकिन वे मानते हैं कि इस धोरे का फार्मेशन (निर्माण) ऐसा है कि जिसकी वजह से रेत आवाज कर रही है।
सेतराऊ गांव के तीन तरफ पहाड़ियों हैं। इसके बीच में कमांडेंट कल्याणसिंह के खेत में यह एक धोरा है, यह धोरा किसी रहस्यमय के वजह से शुरखियाॅ मे है जो उनके पथरीली जमीन पर बने पैतृक मकान के ठीक पीछे है। इस धोरे का आकर्षण इसकी रेत का संगीत धुन ही है। इस धोरे की रेत को जैसे ही आपस में टकराते हैं या इस पर दौड़ते हैं हाथ से टक्कराते तो भपंग भपंग जैसी आवाज निकलने लगती है।जैसा लगता पानी मे पत्थर डाला हो ऐसा प्रतीत लगता है जैसे रेत कुछ कहना चाहती है। गांव के लोग कही जमाने से आवाज को यह सुन आ रहे हैं।
यह है एक भौगोलिक विशेषता
करीब 15 साल पहले इस रेत के नमूने जांच को भेजे गए थे, लेकिन कोई ठोस वजह सामने नहीं आ सकी। भू वैज्ञानिकों तर्क के अनुसार प्रथम दृष्टया यह नजर आता है कि रेगिस्तान से उड़ती हुई यह रेत पहाड़ियों से टकराकर यहां जमा होती गई रेत और धोरे का निर्माण हुआ। यहां निकट में ग्रेनाइट का पत्थर भी मोजुद है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कहीं न कहीं इसमें रेत के साथ अन्य तत्वों का मिश्रण होता गया, जो भौतिक विज्ञान के अनुनाद और प्रतिध्वनि के सिद्धांत को अपना रहा है।
अब तक नहीं पता चला सका इसका इस ध्वनि विशेष कारण.
इस रेत की जांच होती है तो प्रतिध्वनि और अनुनाद के सिद्धांत का कहीं न कहीं कारण होगा। इस धोरे का निर्माण, पास की पहाड़ियों और रेत में कौन-कौन से कण हैं, ऐसे तत्व मोजुद है जो यह महत्व रखेगा
यह हमारे गांव की अनमोल थाती है। संगीत देने वाले इस धोरे को जमाने से सुनते आ रहे हैं। कारण क्या है, इसका किसी को पता नहीं है, लेकिन हम गर्व से कहते हैं कि हमारे गांव आओ, यहां तो रेत भी गीत संगीत गाती है। -
जहां कुछ दिन पहले टीवी न्युज नेशन टीम एव विशेषज्ञ पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित नेतृत्व मे बारिकी से धोरे कि विशेष पङताल कि बारिकी से जाँच कि गई जिसमें धोरे मे बाङमेर कि खूबसूरत अद्भुभुत एक कला का इसका आभास है
इसी खास वजह से पर्यटकों मे खासी आवाजाही लगातार बढ रही है इस धोरे कि आवाज सर्दियों मे थोङी कम हो जाती है पुनः गर्मियों बढ जाती है
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