रिपोर्ट बाए- दिलीपसिंह राजपुरोहित
सिवाना । जैसा नाम वैसा ही काम। दूर अधेरे में ग्रामीण भारत का टिमटिमाता हुआ आशा का दीप, संस्कारी युवा, गजब की ऊर्जा आैर प्रतिभा के धनी, सकारात्मक साेच,लाेक परंपरा आैर संस्कृति की जानकारियाें का खजाना। ये न ताे काेई आईएएस ना आरएएस के पद पर है न नेता या नेता के बेटे, नहीं सरकारी नाैकरी में भी सबसे आखरी पायदान पर। कहने काे महज कम्पाउंडर है । पर ये साधारण परिवार आैर बाड़मेर जिले के छाेटे से सिलोर गांव से जन्म हैं। लेकिन ये नाैजवान हमारे विवेकानंद जी के सपनाें के भारत का समर्थ युवा है। जाे धरातल पर बड़ी संजीदगी से सनातन संस्कृति आैर मानवीय मूल्याें काे बचाने आैर बढाने में जी जान से जुटा हुआ है। ऐसे महान इंसान को मै दिल की गहराई से समान करता है। वैसे समाज के अन्दर जन्म तो हर कोई लेता है। लेकिन साधारण परिवार जन्म लेकर 36 कोम को साथ लेकर भले गाँव विकास कि हो या अन्य दुसरे समाज के दुख सुख कि हो। हमेशा अपने क्षेत्र कार्य मे सर्तकत रहता है एव समय समय पर हर समाज के कार्य मे मदद के हाथ बटाते है।


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