बालोतरा
निकटवर्ती गाव असाडा में राजपुरोहितो का वास में वर्षों पुरानी महासती की प्रतिमा का विधिवत रूप से जीर्णोद्धार किया गया असाडा गाव के राजपुरोहित समाज के डावीयाल गोत्र के असाडा की स्थापना स्वत 1562 से लेकर गाव के इतिहास को दोहराते हुए। युवा किशोरसिंह असाडा ने बताया कि सवंत 1849 में श्री मति जिंवा देवी मथर धर्मपत्नी श्री फतेहसिंहजी डावीयाल ने विशेष कारण को लेकर सती प्रथा को निभाते हुए अपनी देह को सतीत्व की ज्वाला में समर्पित कर दिया पूर्व इतिहासकारों ने देवी सती के सती होने के विशेष कारण को ध्यान में रखकर सती को महासती मथर मॉ का दर्जा दिया गया हाल ही में उनकी प्रतिमा का नव निर्माण कर विधिवत रूप से रात्रि जागरण रखकर सुबह शुभ मुहूर्त में मूर्ति की स्थापना हवन की पूर्णाहुति देकर ढोल नगाड़ो के धमाकों के साथ गगन चुम्बी जयकरों के बीच साधु संतों की उपस्थिति में विशेष पूजाअर्चना कर मंत्रोच्चार से कि गई इसी कार्यक्रम में भव्य महाप्रसादी का आयोजन मे भाग लिया गया जिसमें सभी भाविकों ने बढ़ चढ़ कर लाभ लिया समाज के संगठन श्री खेतश्वर युवा फोर्स के सभी कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम की कमान को संभालते हुए कार्यक्रम सुदृढ़ और सफलतापूर्वक अंतिम रूप दिया इसी दौरान गाव में समाज के वरिष्ठ धुकसीह जी ,माधुसिंह जी , कोजराजसिंह जी ,गीगासिंहजी , मंगलसिंह, खीमसिंह ,, राजूसिंह , मंगलसिंह , हंसराज ,मलसिंह, नरपतसिंह , सुजानसिंह , मोहनसिंह,मुकनसिंह ,अर्जुनसिंह विजयसिंह ,पुंजराज,मांगीलाल ,भिखसिंह , पुखराज ,घेवरसिंह आदि कई लोग मौजूद रहे
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