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Tuesday, 17 July 2018

संस्कारित जीवन के साथ-साथ वेद-उपनिषदों का अध्ययन करें : वेदांताचार्य डाॅ. ध्यानाराम जी

बाड़मेर

राजपुरोहित छात्रावास में समाज की प्रतिभाओं के सम्मान के लिए वार्षिकोत्सव-2018 समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम महंत निर्मलदास महाराज, वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम के सानिध्य में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीएसएफ डिप्टी कमांडेंट मनोहरसिंह बावड़ी, अध्यक्षता कानसिंह बीसू खुर्द, विशिष्ट अतिथि विकास अधिकारी चौहटन बाबूसिंह जेतपुर, शिव तहसीलदार शैतानसिंह खैरवा, प्रधानाचार्य इंद्रसिंह रड़वा रहे।

इस दौरान महंत निर्मलदास ने कहा कि छात्रावास को बनाने में पूर्वजों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए। वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम ने संस्कारित जीवन अपनाने व वेदों-उपनिषदों का ज्ञान अर्जित करने की बात कही। मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए डिप्टी कमांडेंट मनोहरसिंह ने विद्यार्थियों को स्व अनुशासन पर बल देने के साथ एकाग्रचित हो कर पढ़ने की बात कही। कानसिंह ने शिक्षा के साथ समुदाय को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। बाबू सिंह ने समाज को एक लक्ष्य तय करके आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कुटुम्ब के विकास से ही आगे बढ़ा जा सकता है। विशिष्ट अतिथि पद से बोलते हुए प्रधानाचार्य इंद्र सिंह नीमली ने बताया कि माता-पिता व गुरु की सेवा तथा शिक्षा के प्रति जागरूक रहकर समाज को प्रगतिशील बनाया जा सकता है। कार्यक्रम को रामसिंह बोथिया, शंकरसिंह आसोतरा, नाथूसिंह लखा ने भी संबोधित किया। सदन की ओर से एबीवीपी संयोजक स्व. श्रवणसिंह एल बालेरा को श्रद्धांजलि दी गई।

कार्यक्रम के संयोजक लक्ष्मण सिंह बालेरा ने बताया कि कार्यक्रम में समाज की 145 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान हेमसिंह महाबार, किशोर सिंह बालेरा, पोकर सिंह बीसू, खुशालसिंह लंगेरा, देरावरसिंह बालेरा, भैरूसिंह रड़वा उपस्थित रहे।

छात्रावास विकास समिति के सचिव खुमानसिंह ने अतिथियों का स्वागत अभिनंदन किया। कार्यक्रम के अंत में छात्रावास विकास समिति के अध्यक्ष मोहनसिंह महाबार द्वारा आभार व्यक्त किया गया। राजेंद्र सिंह चावडा द्वारा रोडवेज बस में यात्रा करने वालों के लिए पास बनाने के लिए निर्देश दिए गए। कार्यक्रम का संचालन अशोकसिंह मकवाना रड़वा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में भीखसिंह बालेरा, गेमरसिंह फोगेरा, डॉ. रणवीरसिंह लखा, भंवरसिंह गिराब, जुंजार सिंह बालेरा, बबलू सिंह बीसू कला, हेमंत राजपुरोहित बांदरा सहित समाज के युवाओं का सहयोग रहा।

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